Thursday, April 30, 2020

सोचा था मिलेगी हाईक, लूंगा एक नही बाइक, 
साल भर की मेहनत पे , फिर गया पानी है

मुँह बन्द कर, चुप चाप रहना पड़ेगा
जैसे तैसे इस साल नौकरी बचानी है।

ऐसा आया वायरस, क्या करे ओ सायरस
हर वक़्त बॉस की ही होनी मनमानी है।

राजा घर, रंक घर, सेठ साहूकार घर
नौकर को ड्यूटी भी घर से बजानी है।

सोचा था घूमेंगे गोआ, थाईलेंड सिंगापुर
अब तो पूरी गर्मियां घर में बितानी है।

बैठे है सब छुप कर अपने ही घर पर
कौन है बलिष्ठ जिसे अपनी सुजानि है 

ऐसा आया वायरस, क्या करे ओ सायरस
हर वक़्त बॉस की ही होनी मनमानी है।

कॉल मीटिंग प्रेजेंटेशन करके जो फ्री हुए तो
बीवी बोली आओ धनिया मिर्ची कटवानी है

नित नए व्यंजनों के हो रहे प्रयोग ऐसे
जैसे पैदाइशी हलवाई खानदानी है 

चाय सुट्टा यारो संग गप्पो की यादो को सोच
चुप चाप अपनी भीगी पलके छिपानी है 

अमरीका यूरोप ब्रिटेन कर रहे है चापलूसी
सबको हैड्रोक्लोरोक्वीन हमसे जो मंगानी है

ऐसा आया वायरस, क्या करे ओ सायरस
हर वक़्त बॉस की ही होनी मनमानी है।

घर में ही रहना यारो, सब पर विपत्ति है ये
मिल कर देश को ये जंग जीतवानी है 

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